पटना राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी नियामक प्राधिकरण विधेयक को लेकर राज्य सरकार को सजग करने के लिए मुहिम शुरू हो गयी है। बीटी बैगन को राज्य सरकार द्वारा स्वीकार नहीं किए जाने को लेकर भी इसी प्रकार का जागरूकता अभियान शुरू किया गया था।
जीएम फ्री बिहार मूवमेंट की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र भेजकर केन्द्र द्वारा प्रस्तावित विधेयक से उत्पन्न खतरों को गिनाया गया है। इसमें कहा गया है कि प्रस्तावित विधेय#mce_temp_url#क में कृषि व स्वास्थ्य पर राज्यों के संवैधानिक अधिकार को छीनने की कोशिश की गयी है,जो देश के संघीय ढांचे की व्यवस्था का घोर उल्लंघन है। प्रस्तावित विधेयक में राज्य सरकारों को राज्य बायोटेक्नोलाजी नियामक सलाहकार समिति में सिर्फ सलाह देने तक ही सीमित रखा गया है।
मूवमेंट की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि कृषि व स्वास्थ्य राज्य का विषय है। इसमें जैव विविधता कानून बनाने के राज्यों के अधिकार को छीना जा रहा है। ऐसे में यह फैसला जैव विविधता के संरक्षण के विरुद्ध है। प्रस्तावित विधेयक को लेकर कहा गया है कि एग्रीकल्चरल बायोटेक्नोलाजी के बारे में 2004 में गठित टास्क फोर्स ने अपनी रिपोर्ट में एक विश्वसनीय नियामक प्राधिकरण के गठन की सिफारिश की थी। रिपोर्ट में देश की बायोटेक्नोलाजी नियमन नीति को लेकर स्पष्ट तौर पर एक सीमा रेखा खींची थी। इसमें कहा गया था कि पर्यावरण की सुरक्षा, किसानों के हित, परिस्थितिकीय व कृषि प्रणाली में आर्थिक निरंतरता,उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य व उनकी पोषकता, देश की बायोसुरक्षा व घरेलू व विदेश व्यापार के संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। प्रस्तावित विधेयक में इसकी अनदेखी का आरोप किया गया है। राज्य सरकार से कृषि राज्य का विषय होने के कारण अपना नियामक तंत्र बनाने का मौका प्राप्त करने के लिए समय रहते आवाज उठाने का अनुरोध किया गया है। जीएम मुक्त बिहार अभियान के संयोजक पंकज भूषण ने कहा कि इस मुद्दे पर सघन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

सार्थक अभिव्यक्ति।